विकास की बाट जोह रहे दुमका के दो गाँव, न सड़क है, न बिजली, न पानी  

दुमका– मसलिया प्रखंड का रांगा और आमगाछीपहाड़ गांव के ग्रामीण आज भी विकास की बाट जोह रहे है।  यह दोनों गांव एक आदिवासी बहूल क्षेत्र हैं। जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इस क्षेत्र में न ही सड़के है न ही पेयजल की कोई सुविधा। ग्रामीण आज भी पथरीले रास्तों पर चलने को मजबूर है।  वहीं पेयजल के लिए वर्षों पुराने कुओं पर निर्भर है। झारखंड राज्य के गठन के बाद से अब तक इस गाँव की तस्वीर में कोई बदलाव तो नहीं आया । कई वर्षों से ग्रामीण जैसे तैसे जीवन गुजर बसर कर रहे है। कई बार ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान गाँव की बदहाली की ओर ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की। लेकिन जिला प्रशासन के अनसुने रवैये से तंग आकर ग्रामीणों ने इस गाँव के विकास की आस भी लगभग छोड़ ही दी थी। लेकिन द्रौपदी मुर्मू के देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के बाद अब इन आदिवासी ग्रामीणों की उम्मीद एक बार फिर जाग उठी है। जिसके बाद अब इन्होंने राष्ट्रपति को गाँव के विकास को लेकर आवेदन देने का निर्णय लिया है। अब देखना ये होगा की ग्रामीणों का अपने गाँव का विकास करने सपना कब तलक पूरा होता है।

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